सवाई माधोपुर। कूनो से रणथंभौर की सीमाओं को लांघकर आया चीता KP2 अब इंसानी बस्तियों के करीब पहुंच गया है। जिला मुख्यालय के उपनगरीय इलाकों में चीते की मौजूदगी ने वन विभाग और प्रशासन की नींद उड़ा दी है।

क्यों आबादी की ओर आया चीता?

वन विशेषज्ञों का मानना है कि रणथंभौर के जोन नंबर 9 में बाघों, बाघिनों और पैंथर्स के अत्यधिक दबाव (Territorial Pressure) के कारण अपनी सुरक्षा के लिए चीता KP2 ने जंगल छोड़ दिया और सुरक्षित स्थान की तलाश में जीनापुर और श्याम वाटिका के खेतों तक पहुंच गया।

निगरानी के लिए 'हाई-टेक' इंतजाम

वन विभाग की टीम सूचना मिलते ही हरकत में आई और चीते की लोकेशन ट्रेस करने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है:

  • ड्रोन कैमरों से सर्च: घनी झाड़ियों और खेतों के बीच चीते की सटीक स्थिति जानने के लिए ड्रोन उड़ाए जा रहे हैं।
  • सतत मॉनिटरिंग: रेस्क्यू स्टाफ और वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम लगातार चीते के पदचिह्नों और गतिविधियों का पीछा कर रही है।

वन विभाग की चुनौतियां और अपील

  • सुरक्षित रेस्क्यू: विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती भीड़भाड़ वाले इलाके से चीते को बिना किसी चोट के पकड़कर वापस प्राकृतिक आवास में छोड़ना है।
  • जनहानि का खतरा: आबादी क्षेत्र होने के कारण वन प्रशासन ने स्थानीय लोगों से घरों के भीतर रहने की अपील की है।
  • विशेष सावधानी: बच्चों और बुजुर्गों को अकेले बाहर न निकलने और किसी भी अफवाह पर विश्वास न करने के निर्देश दिए गए हैं।