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बाजरे की रोटी के गीतकार, लेखक गजानन वर्मा नहीं रहे

(2012-05-19 23:11:42 +0530)

राजस्थानी के सुप्रसिद्ध गीतकार, संगीतकार गजानन वर्मा का गुरुवार को दिल का दौरा पडऩे से निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को उनके पैतृक गांव रतनगढ़ में किया गया। 23 मई 1926 को रतनगढ में जन्मे गजानन वर्मा 86 वर्ष के थे। गजानन पिछले 2-3 वर्षों से कैंसर रोग से पीडि़त होने के बावजूद अपने जन्म स्थान रतनगढ़ में रहते हुए साहित्य की सेवा करते रहे।

गजानन वर्मा राजस्थानी लोक शैली के प्रख्यात कवि-गीतकार थे जिनके लिखे गीत उनके जीवन काल में ही लोकगीत हो गए। बहुमुखी प्रतिभा के धनी गजानन वर्मा मंचीय कविता पाठ द्वारा राजस्थान और प्रवासी राजस्थानियों के चहेते गीतकार हो गए। आज भी राजस्थान के लोकगीतों के रूप में उनके लिखे गीत बाजरे की रोटी पोई, फुलियै री मां, भंवर म्हारौ सोने रो गलपटियौ, चिमक च्यानणी रातां में, फागण आयो रे हठीला, आभै चमके बीजली, आओ जी परदेशी म्हारा, पिया थे परदेस बसौ तो जन-मानस में रचे बसे हैं।

भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के रतनगढ़ आगमन पर उनके सम्मान में काव्य पाठ गजानन वर्मा द्वारा किया गया। इनके द्वारा संयोजित पुतली घर (कठपुतली) नाट्य संस्थान का उद्घाटन नई दिल्ली के मंच पर पं. जवाहर लाल नेहरू के कर कमलों से हुआ। गणतन्त्र दिवस पर दिल्ली के लाल किले पर होने वाले अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों में इन्होंने देश-विदेश के श्रोताओं में ख्याति प्राप्त की।

देश की प्रतिष्ठित संगीत कम्पनी एच.एम.वी. के गायक के रूप में उनकी आवाज में कई ग्रामोफोन रिकॉर्ड्स निकल चुके हैं। अभी वीणा ने उनके एकल गीतों का अलबम बाजरै की रोटी जारी किया है। सुप्रसिद्ध संगीतकार भूपेन हजारिका के साथ बंगला और असमिया फिल्मों में हिन्दी और राजस्थानी गीतकार, अभिनेता के रूप में उन्होंने पहचान बनाई।

गजानन वर्मा अखिल भारतीय स्तर के वरिष्ठ कवि और गीतकार थे। उन्होंने न केवल राजस्थानी बल्कि हिन्दी फिल्मों के लिए भी गीत लिखे और गाए। गणतंत्र दिवस पर नई दिल्ली में होने वाले अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों में इनके गीतों की धूम रही। उन्होंने राजस्थानी में कई लघु फिल्मों का निर्माण भी किया।

राजस्थान के सूचना एवं जनसम्पर्क मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने हिन्दी और राजस्थानी के सुप्रसिद्ध गीतकार गजानन वर्मा के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की है। सिंह ने कहा कि स्व. वर्मा उच्च कोटि के गीतकार थे। उनके साहित्य, नाटक, संगीत के क्षेत्र में दिये गये योगदान को सदैव याद किया जायेगा। उनके निधन से राज्य के साहित्य जगत में अपूरणीय क्षति हुई है। वर्मा के निधन पर अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति ने गहरा शोक व्यक्त किया है। समिति के प्रदेशाध्यक्ष के.सी. मालू, प्रदेश महामंत्री डॉ. राजेन्द्र बारहठ, प्रदेश मंत्री डॉ. सत्यनारायण सोनी, संस्थापक तथा अंतरराष्ट्रीय संगठक लक्ष्मणदान कविया, अंतरराष्ट्रीय संयोजक प्रेम भंडारी और राजस्थानी मोट्यार परिषद के प्रदेश संयोजक अनिल जांदू ने उनके निधन को राजस्थानी भाषा, साहित्य व संगीत की अपूरणीय क्षति बताया है।

(रमेश सर्राफ झुंझुनू, राजस्थान की रिपोर्ट)

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