मॉरीशस में हुआ 11वां विश्व हिंदी सम्मेलन, दुनियाभर से जुटे हिंदीप्रेमी

विराजोसा टूरिज्म, मीडिया मिर्ची क्रिएटिव ट्रस्ट और थार के समूह के साथ भारत से 60 हिंदीप्रेमियों ने की शिरकत

विश्व हिन्दी सम्मेलनों ने हमेशा से ही पूरे विश्व के हिंदी प्रेमियों और प्रख्यात विद्वानों को आकर्षित किया है। इसी क्रम में 11वां विश्व हिन्दी सम्मेलन 18-20 अगस्त 2018 को मॉरीशस में आयोजित किया गया जिसका मुख्य विषय ‘हिन्दी विश्व और भारतीय संस्कृति’ रहा।
इस अभिनव वैश्विक सम्मेलन में विराजोसा टूरिज्म, मीडिया मिर्ची क्रिएटिव ट्रस्ट और थार के थार भारत से 60 हिंदीप्रेमियों का समूह शामिल हुआ। भारत से अपने स्तर पर मॉरीशस गया ये सबसे बड़ा दल था। इसमें देशभर के जाने माने शिक्षक, कवि, लेखक, स्तंभकार, मीडिया विशेषज्ञ आदि शामिल थे। इनकी नाम इस प्रकार हैं -
डॉ. अखिलेंद्र प्रताप सिंह
सुश्री अंजलि प्रकाश सिंगेवार
सुश्री अंजना सोलंकी
सुश्री अनुभा जैन
डॉ. बापूराव देसाई
डॉ. चंद्रकांत मिसाल
श्री धीरेंद्र नाथ जैन
डॉ. जयश्री शिन्दे
डॉ. कल्पना गवली
श्री मुकेश मिश्रा
डॉ. नयना डेलीवाला
डॉ. निशा मलिक
श्री गजानन प्रकाश सिंगेवार
डॉ. प्रतिभा येरेकर
श्री प्रवीण पांड्या
श्री राजेंद्र राजन
डॉ. रमेश चंद मीणा
डॉ. रंजना अरगड़े
डॉ. रविंद्र जाधव
डॉ. रेणुका मोरे
डॉ. शशिधरन रमन
डॉ. शोभा रतूड़ी
डॉ. सूरत राम
डॉ. विनोद कुमार वायचळ
डॉ. विष्णु सरवदे
श्री सुरिंदर कुमार
डॉ. सुरेश कानाडे
डॉ. स्नेहलता गुप्ता
डॉ. विनिता रानी
डॉ. प्रभा मुजुमदार
डॉ. सुनील देवधर
डॉ. संध्या गर्ग
डॉ. केशव बड़ाया
श्री ओजस बड़ाया
सुश्री प्रीति बड़ाया
सुश्री सारा बड़ाया
डॉ. अखिल शुक्ला
श्री कार्तिकेय शुक्ला
डॉ. इन्दु पाण्डे
सुश्री साईदा मेहरा
सुश्री सोनम सेठ
श्री बलराम गुप्ता
सुश्री चित्रा श्रीवास्तव
श्री जगदीश तोषनीवाल
डॉ. कृष्णा श्रीवास्तव
डॉ. मेनका त्रिपाठी
डॉ. सोनू जेसवानी
सुश्री सुप्रिया पंडित
डॉ. ममता शर्मा
श्री राकेश सिंगरोहा
डॉ. कालीचरण स्नेही
डॉ. सविता तायडे
श्री एंटो पी.डी.
डॉ. प्रभात कुमार शर्मा
डॉ. सुधीर सोनी
श्री संजय गौड़
श्री पारिजात पांड्या
सुश्री शीतल जाधव
श्री वेणुगोपाल
श्री महिपाल राठौड़
गौरतलब है कि हिन्दी को भावनात्मक धरातल से उठाकर एक ठोस एवं व्यापक स्वरूप प्रदान करने के उद्देश्य से और यह रेखांकित करने के उद्देश्य से कि हिन्दी केवल साहित्य की भाषा ही नहीं बल्कि आधुनिक ज्ञान-विज्ञान को अंगीकार करके अग्रसर होने में एक सक्षम भाषा है, विश्व हिन्दी सम्मेलनों की संकल्पना की गई। इस संकल्पना को आज से 43 वर्ष पूर्व 1975 में नागपुर में आयोजित प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन में मूर्त रूप दिया गया।
विश्व हिन्दी सम्मेलनों का भारत के राष्ट्रीय जीवन के लिए सबसे बड़ा योगदान यह रहा कि इसने भाषागत सद्भाव और सहयोग के नए युग का शुभारंभ किया। केवल भारत के हिन्दी प्रेमी ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण हिन्दी जगत का जनमानस इस बात के लिए हर्षित था कि प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन में हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र संघ की मान्य भाषा बनाने की बात उठी । उल्लेखनीय है कि हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा बनाए जाने के आंदोलन की पृष्ठभूमि में मॉरीशस के तत्कालीन राजनैतिक नेतृत्व का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा हैं और यह राजनैतिक सहयोग लगातार मिलता रहा है।
11वें विश्व हिन्दी सम्मेलन में अनूठा प्रयोग किया गया है जिसके अंतर्गत सभी भारतीय राज्यों के प्रतिनिधियों को आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल में शामिल किया गया है जिससे सभी भारतीय भाषाओं का प्रतिनिधित्व सहज ही होता है। यह प्रयास भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “सबका साथ सबका विकास” नीति को भी प्रतिविम्बित करता है।

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