दुल्हा ले लो...दुल्हा....!!!!
दूल्हा ले लो...... दूल्हा...!!!!!
ये वो जीव है जो तक़रीबन हर घर में मिलता है...
गले में प्राईस टैग टांग कर ये लाखो-करोड़ो में बिकता है.|
इस जीव को बेचने वाले आते है बड़े ही बन-ठन के ...
खरीदने वालो के घरों में खाएं माल-मसाले भर-भर के...|
अपने दुल्हे को लेकर घूमे ये विक्रेता घर-घर...
ऊंची बोली लगाने के लिए टर्राया करते टर्र-टर्र ...|
खाने -पीने, पढ़ाई-लिखाई और मेंटेनेन्स का बताकर खर्चा...
सुई से लेकर फर्रारी तक की फरमाइश का थमा देते है पर्चा...|
शादी के बाज़ार में लगाकर दुल्हे की दूकान ...
बेचे दूल्हा ऐसे जैसे हो कोई सामान|
दुल्हन को ना देख.. देखे दुल्हन के बाप की कमाई..
जहां मोटा आसामी मिला वही जीभ लप-लपाई....|
दुल्हन का बाप हो ग़रीब तो गुर्राये...
जो हो अमीर तो दुम हिलाए |
कितने ही युगों से चला आ रहा है ये कारोबार...
आज भी जारी है ये लगातार|
इसलिए कहे "ऊर्मी" जब घर में हो बेटी तो बापू रोता है ...
और बेटे के जन्म पर खुश होकर ये कहता है-
''जब मेरा ये फल एक दिन पकेगा,
एम.बी.ए., इंजीनियर ,डाक्टर बन शादी के बाज़ार में अच्छे दामो में बिकेगा..
मैं भी फिर फेरी लगाऊँगा, लाउड-स्पीकर ले खूब चिल्लाउंगा-
दुल्हा ले लो...दुल्हा....!!!"
प्रियदर्शिनी 'ऊर्मी'
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