(2012-04-27 22:52:13 +0530)
पत्रकार दीपक व्यास ने इंडिया न्यूज़ ज्वाइन कर लिया है | इससे पहले दीपक VOI और सहारा के लिए अपनी सेवाएं दे चुके हैं | वे प्रिंट मीडिया में सांध्यज्योति दर्पण और राष्ट्रदूत के लिए भी काम कर चुके हैं |
प्रिंट और टीवी मीडिया में अनुभव रखने वाले दीपक की सचिवालय और UDH विभाग में अच्छी पकड़ मानी जाती है | करीब 5 महीने पहले उन्होंने सहारा से इस्तीफ़ा दिया था |
कुछ साल पहले एक फिल्म देखी थी... गुरु... उसका एक डायलाग याद आ रहा है.... जब लोग तुमसे जलने लगे (या उनकी जलने लगे) तो समझो तरक्की कर रहे हो.... दीपकजी चिंता मत करो... जलता है या जलती है... तो जलने दो.....
अरे दीपक व्यास जी आपके अजय शर्मा गुरुजी कहां है.... बर्फ में लग गए बेचारे । या फिर कहीं दूसरी सीडी बनाने में तो बिजी नहीं है । और आप इतनों दिन कहां थे । कहीं आपको भी तो गुरुजी जैसे शौक नहीं लग गए । सीडी वाले ..............................................
सही कहा भाई जी, दीपक व्यास ब्राहम्मणवादी पत्रकार है कलमवादी नहीं ।साथ ही अवसरवादी भी है जो मौका देख कर बदल जाता है । ऐसे लुढकने लोटे को इंडिया न्यूज़ ने जगह दी जबकि सहारा से निकालने के बाद इन भाई जी को आठ महीने घर बैठए रहना पड़ा । नौकरी के लिए तरसते इस बेचारे आधे अधूरे पत्रकार को बधाई कि सहारा से निकालने के बाद इंडिया न्यूज़ का सहारा मिल गया ।
इस्तीफा नहीं दिया था .. धक्के देकर निकाला गया था ।
इस्तीफा नहीं दिया था .... धक्के देकर निकाला गया था । अजय शर्मा की चापलूसी करने वाला दीपक जब बुझा तो धुआं निकल गया । अब इंडिया न्यूज़ में भी राजनीती की बू आने लगेगी । सहारा में किसी से जनाब के बारे में चर्चा तो करके देखिए ।बात रही सचिवालय में पकड़ की तो एक बार ये ही पूछ कर देख लीजिए कि सचिवालय में सरकार के सचिवों की संख्या कितनी है ?इसे रेल बजट और आम बजट में तो फर्क पता नहीं ...सहारा मे लाइव के दौरान आम बजट को रेल बजट बोल रहे थे जनाब । जो पुष्पेन्द्र इन्हें सहारा में लेकर आए ...उन्हीं की जड़े काटने में लगे थे दीपक कुमार। नरेश कुमार कैमरामेन ने लाइव सिखाया ...और उसी की बत्ती जलादी दीपक ने । अजय शर्मा की आड में विरष्ठ पत्रकार सत्येन्द्र शुक्ला के साथ इनका अभद्र व्यवहार किसी से छिपा नहीं है । लेकिन क्या हुआ ..ये सब आज अच्छी जगह हैं और इन्हें 5 साल घर बैठने के बाद उसी चैनल(इंडिया न्यूज़)में नौकरी मिली है जिसके प्रसासरण को ये बचकाना कहते थे । खैर जो भी हो ...बधाई ।