वो एक छूअन ......
जो चाहत ना थी दिल में कभी
उसके छूअन से बढ़ गई,
नज़रों को उसकी देखकर मेरी नज़रें ख़ुद-ब-ख़ुद झुक गई ......
आहट भी हो बाहर
तो लगे सामने है वो खड़ा
अब लगे खुशबू भी उसकी जैसे हवा में बस गई...
वो ऐसे ही पूछ बैठा आज
'ऊर्मी' हाल-ए-दिल सुनाओ अपना
उफ!!!धड़कने थमी और सांस रूक गई...
उसके चहरे के नूर से
लगा चाँद है उगा,
उस चाँद की तमन्ना में अब ये चांदनी मिट गई .....
प्रियदर्शिनी "ऊर्मी"
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