राजनीति, अपराध और सेक्स को मिलाकर जो कॉकटेल बनती है वो अच्छे-अच्छों के होश उड़ा देती है. भंवरी देवी प्रकरण राजस्थान की राजनीति में जो भंवर लेकर आया है उसने इस बात को साबित कर दिया है. इस तरह के प्रकरणों में कभी न तो नेताओं को सजा हुई है और न ही कभी उन पर आरोप साबित हुए हैं.
भंवरी देवी प्रकरण
भंवरी देवी की बहुचर्चित सेक्स सीडी यूट्यूब पर आसानी से उपलब्ध है. उसे देखकर पता चलता है कि मदेरणा और भंवरी के बीच ताल्लुकात कतई नए नहीं थे.
सीबीआई ने भंवरी देवी के पति अमरचंद को भी गिरफ्तार कर लिया है. कोई बहुत आश्चर्य नहीं कि प्रकरण में उसकी भी कोई संलिप्तता निकले.
गौर करने वाली बात ये है कि भंवरी देवी एक साधारण सी नर्स थी लेकिन उसके पास कार और ड्राइवर भी थे. जब भंवरी इनको अफोर्ड कर रही थी तब क्या उसके पति ने इन चीजों के देखा नहीं था, या फिर देख कर अनदेखा कर दिया था, और यदि उसने अनदेखा किया था तो इसके पीछे क्या कारण थे.
भंवरी राजनेताओं के जाल में कैसे फंसी और फिर क्यूं नहीं निकल पाई? एक नर्स और लोकगायिका भंवरी देवी ब्लैकमेलर कैसे बन गई? ये वो सवाल हैं जो इस प्रकरण से वाकिफ किसी भी शख्स के जेहन में आए होंगे.
यह देश के कानून की विडंबना है कि जब तक किसी की मृत देह न मिल जाए उसको मृत नहीं माना जाता और यदि माना भी जाता है तो सात सालों के बाद.
सब जानते हैं कि हाल तो भंवरी बची नहीं होगी और यदि बची भी होगी तो इतना सब होने के बाद मार दी गई होगी. यकीनन अब सच तो उसके साथ ही चला गया लेकिन जिस गति से काम हो रहा है उसके हिसाब से सच सामने आते आते सालों लग जाएंगे यह बात तय है.
कुछ दिन पहले मदेरणा समर्थकों ने टीवी चैनलों की गाड़ियों में तोड़-फोड़ की और उसकी पत्नी ने कहा कि देश में कुछ और नहीं दिख रहा आपको, इसी एक प्रकरण के पीछे पड़ गए. उन्होंने लगे हाथों सरकार को भी धमकी दे दी कि हमारी जाति के लोग चुप नहीं बैठेंगे.
गजब है, शायद ऐसा सिर्फ भारत में ही हो सकता है.
कविता केस
बहुत ज्यादा वक्त नहीं हुआ जब उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में भी एक ऐसा ही केस सामने आया था. उस वक्त मैं पत्रकारिता में जड़ें जमाने के लिए प्रयासरत था. बात 2006 की है.
एक अखबार में खबर छपी कि कविता नाम की एक लड़की पिछले कुछ दिनों से गायब है. स्टोरी पर गए तो उसके भाई सतीश मलिक ने बताया कि उसके गायब होने के पीछे कुछ राजनेताओं का हाथ है.
अब ये टीवी के लिए बड़ी खबर बन चुकी थी. एक चैनल पर खबर चलते ही कविता का गांव पीपली लाईव बन गया. तमाम हिंदी अंग्रेजी के चैनलों की ओबी वैन वहां खड़ी नज़र आने लगीं.
समाजवादी पार्टी और रालोद के गठबंधन की सरकार थी और इल्जाम था बेसिक शिक्षा मंत्री किरनपाल सिंह पर. आरोपी रालोद के नेता मेराजुद्दीन भी थे.
लोकिन एक दिन ज़ी न्यूज़ के स्टुडियो में रविंद्र नाम के एक आदमी ने खुद को कविता का कातिल बताते हुए सरेंडर किया. इसके बाद कई गिरफ्तारियां हुईं लेकिन नेताजी साफ बच गए.
कविता पर भी आरोप था कि वो ब्लैकमेलर थी और उसने नेताओ की अश्लील सीडी बना रखी थीं. इन सीडीयों में कथित तौर पर कविता और नेताओं के अंतरंग दृश्य कैद थे.
2008 में गाजियाबाद की डासना जेल में खुद को हत्यारा बताने वाले रविंद्र प्रधान की मौत हो गई. उसके परिवार ने आरोप लगाया कि उसे जेल में जहर दे दिया गया.
मामला तकरीबन खत्म हो गया. हालांकि हालात एक बार ऐसे भी आए कि कविता का भाई 2007 के विधानसभा चुनावों में भी हिस्सा लेने वाला था.
शीतल बिरला केस
2007 में मैंने न्यूज़-24 ज्वाइन किया था. 2009 में ये केस जिस वक्त सामने आया तो पहली नज़र में उतना गंभीर नहीं लगा.
शीतल बिरला नाम की एक लड़की ने आगरा में पुलिस थाने में जमकर बवाल काटा और वो गुड्डू को आरोपी बता रही थी. उसका कहना था कि गुड्डू के कहना पर पुलिस उसके झूठे मामले में फंसा रही है.
गुड्डू पंडित बुलंदशहर की डिबाई सीट से विधायक थे और उनका दबदबा जगजाहिर था. वो कल्याण सिंह के बेटे को चुनाव में हराकर विधायक बने थे.
न्यूज़-24 पर खबर सुबह छह बजे चलनी शुरू हुई तो दोपहर दो बजे तक विधायक जी को मायावती ने गिरफ्तार करा दिया.
गुड्डू और महिला की शादी की तस्वीरें भी अखबरों की सुर्खियां बनीं. गुड्डू पंडित कुछ वक्त जेल में रहे लेकिन फिर बाहर आ गए, उसी दबंगई के साथ.
शीतल का आरोप था कि दोनों की शादी हुई थी और विधायक ने फिर उससे शादी करने से इंकार कर दिया और उसे रखैल बनने को कहा.
विधायक गुड्डू पंडित एक वक्त अमरमणि त्रिपाठी के ड्राइवर थे. अमरमणि त्रिपाठी खुद मधुमिता शुक्ला प्रकरण में जेल में हैं.
(इस ब्लॉग के लेखक वरुण पेशे से पत्रकार हैं और फ़िलहाल नई दिल्ली में Star News से जुड़े हुए हैं)
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Bilkul Sabhi kaha Varun ji aapne
gud going