डॉ. विजय कुमार भार्गव वैश्विक हिंदी सेवा सम्मान से सम्मानित

डॉ. विजय कुमार भार्गव, वरिष्ठ वैज्ञानिक (सेवानिवृत्त), भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र को, उनके आजीवन हिंदी – प्रतिष्ठापन के कार्य और परमाणु ऊर्जा जैसे अति विशिष्ट वैज्ञानिक विषय को हिंदी में प्रतिपादित करने में महत्वपूर्ण योगदान के लिए 11 जनवरी, 2020 को वैश्विक हिंदी सम्मेलन की तरफ से वैश्विक हिंदी सेवा सम्मान से विभूषित किया गया।

डॉ. विजय कुमार का जन्म 1935 में हुआ। 1956 में MSc की उपाधि अर्जित कर डॉ . विजय कुमार ने सन् 1956 से 1961 तक राजस्थान सरकार में वरिष्ठ वैज्ञानिक शिक्षक के पद पर कार्य किया और मार्च 1961 में भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र के विकिरण संरक्षण प्रभाग में प्रवेश किया। परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेन्सी की छात्रवृति पर न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय भेजे गए। वहां से सभी विषयों में A Grade लेकर ME की उपाधि अर्जित कर 1970 में India लौटे। America प्रवास ने भार्गव की सोच को बदल दिया और राष्ट्र के संसाधनों से जुड़े शेाध के लिए मौलिक चिंतन, देश के लगाव की दृष्टि से स्वभाषा का महत्व और अपना लक्ष्य स्पष्ट परिलक्षित होने लगा। धर्मपत्नी  के सहयोग से परमाणु ऊर्जा ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आपने हिन्दी भाषा में अनेक संगोष्ठियां कीं, 40 बड़े – बड़े चार्ट बनाए और संगोष्ठियों में प्रदर्शित किए।

आपने परमाणु ऊर्जा शेाध ग्रंथ द्विभाषिक प्रस्तुत किया, जिसके लिए परमाणु ऊर्जा के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. चिदम्बरम द्वारा सम्मानित किए गए। सन् 1995 में अवकाश प्राप्त करने के बाद भारतीय भाषा प्रतिष्ठापन राष्ट्रीय परिषद की स्थापना की और हिन्दी के प्रचार-प्रसार में लगे रहे। सम्प्रति दृष्टिहीनों के लिए हिन्दी ब्रेल में प्रकाशित विज्ञान पत्रिका का सम्पादन किया। अब इस आयु में राष्ट्र और राष्ट्रभाषा – प्रेम से ओत-प्रोत हो कर हिन्दी में वैज्ञानिक पुस्तकें लिख रहें हैं। आप ‘क्षः किरण एवं नाभिकीय विकिरण द्वारा चिकित्सा‘, ‘एटम की कहानी’, ‘पर्यावरण एवम् विकिरण‘,ʽआध्यात्मिक चिंतन का वैज्ञानिक दृष्टिकोण‘ लिख चुके हैं और अब ʽवेद और विज्ञान‘ पर लिखा हैं। ‘क्षः किरण एवं नाभिकीय विकिरण द्वारा चिकित्सा पर पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है। विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए सरल हिंदी में लिखित ये मौलिक पुस्तकें अत्यंत उपयोगी हैं।

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