सप्तक-द म्यूजिकल ऑक्टेव, जयपुर ने सजाई सुर संध्या

“सप्तक-द म्यूजि़कल ऑक्टेव, जयपुर” की तरफ से जयपुर के दुर्गापुरा स्थित कृषि अनुसंधान केन्द्र सभागार में संगीतमयी शाम का आयोजन किया गया। दो अक्टूबर को हुए इस कार्यक्रम “दिल ने फिर याद किया” में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को भी उन्हीं के प्रिय गीतों की गीतमाला के माध्यम से श्रद्धांजली दी गई।इसमें महात्मा गांधी कॉलेज के प्रिंसिपल डाॅ. गणेश नारायण सक्सेना ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।

इस दौरान डॉ. सक्सेना ने सभी कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए नियम से रियाज़ करते रहने की सलाह दी। इस सुरबद्ध संध्या में सभी कलाकारों ने सधी हुई और परिपक्व गायिकी का परिचय देते हुए सप्तक के सात सुरों की गरिमा को बनाए रखा। सुरों से सजी इस संध्या में किशोर कुमार, लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी, कुमार सानू, कविता कृष्णमूर्ति, श्रेया घोषाल, सोनू निगम के गीत गाकर कलाकारों ने समा बांध दिया।

इस संगीत संध्या में जयपुर के चिकित्सकों ने 50 के दशक से लेकर आज तक के हिन्दी फिल्मी नगमों को अपनी आवाज दी। इस मौके पर सप्तक के सभी गायकों ने वैष्णव जन तो, हे राम और गांधी जी के अन्य प्रिय गीतों की माला के माध्यम से दी श्रद्धांजली दी और सभागार में बैठे लोगों ने गांधी जी के सिद्धांतों को अपने जीवन में आत्मसात करने का प्रण लिया ।

‘सप्तक’ की ओर से आयोजित इस संगीत संध्या में प्रदीप भारद्वाज, डाॅ. मुकुल तैलंग, डाॅ. उमा विजय, राजेश गोस्वामी, डाॅ. रुचि गोस्वामी, डाॅ. शिवराज शर्मा, प्रबोध गोस्वामी के साथ जयपुर के मेडिकल प्रोफेशनल्स डाॅ. रोहिन भाटिया, डाॅ. रेनु सहगल, डाॅ. हेमा उदावत, डाॅ. सलिल कुकरेजा, डाॅ. खय्याम मोईन, पवन सेन, प्रियांक अग्रवाल, डाॅ. संतोष हिम्मीगी, डाॅ. अनिकेत मोन्डाल, गौरव शर्मा, लक्ष्मण वाधवानी, डाॅ. इति गौड, डाॅ. ज्योतिमा सक्सेना, नंदिनी शर्मा, हर्षिता शर्मा ने सिनेमाई संगीत को अपने अंदाज में जीवंत किया। सप्तक-द म्यूजि़कल ऑक्टेव, जयपुर की ओर से आयोजित इस संगीत संध्या में इन डाॅक्टर्स ने संगीत सफर को साकार किया।

सुरमणि भास्कर गोस्वामी ने मीडिया मिर्ची को बताया कि इस ग्रुप का मुख्य उद्देश्य संगीत की विभिन्न विधाओं (गायन, वादन, नृत्य) में रुचि रखने वाली प्रतिभाओं को निखारना और उन्हें एक मंच प्रदान करना है। इसी क्रम में ग्रुप की ओर से ये 8वां कार्यक्रम आयोजित किया गया है। सप्तक संस्था के चीफ एडवाइजर प्रदीप भारद्वाज के अनुसार सप्तक संस्था संगीत, कला और संस्कृति को प्रोत्साहन देने की दिशा में काम कर रही है और सभी आयु वर्ग के संगीत प्रेमियों को विभिन्न विधाओं से भी अवगत कराती रही है।

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