‘मां का आंचल’ बना भावनाओं की पोटली, भावुक हुआ पाथेय भवन सभागार

maa ka aanchal

जयपुर के मालवीय नगर के पाथेय भवन में गीतों और गजलों के कार्यक्रम ‘मां का आंचल’ का आयोजन किया गया। श्रीमती रतन देवी सक्सेना की स्मृति में आयोजित इस तीसरे संस्करण में कलाकारों ने ओपन माइक पर कविता, गीत और विचारों के साथ मां के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। पद्मश्री शाकिर अली (चित्रकार), पद्मश्री अर्जुन प्रजापति (मूर्तिकार), कन्हैया लाल चतुर्वेदी (संपादक, पाथेय कण), नवल डागा (पर्यावरणविद), रिजवान एजाजी (वरिष्ठ लेखक) ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इससे बाद मीत सक्सेना, अंकित सक्सेना और त्रणिका सक्सेना ने गणेश वंदना पर आधारित नृत्य से प्रस्तुतियों का आगाज किया।

गायक कलाकार सुमंत मुखर्जी, शिलपी मिश्रा, स्वाति श्रीमाल खींचा, गुलजार हुसैन, के. पी. सक्सेना, डॉ. विकास सैनी, विजय सैनी, हरिंदर कुमार भट्ट और एम. के. सक्सेना ने मां की समर्पित फिल्मी गीतों की प्रस्तुति दी। संगीत संयोजन गुलजार हुसैन और टीम का था। वहीं, साहित्यकारों, लेखकों और समाजसेवकों के साथ दूरदर्शन के कार्यक्रम प्रमुख के. के. बोहरा, सहायक केंद्र निदेशक, डॉ. ओमप्रकाश सहाय और प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव राज किशोर सक्सेना ने भी मां की महिमा को अपने शब्दों में बयां किया।

कार्यक्रम के दौरान डीडी राजस्थान के प्रसिद्ध टीवी एंकर रवि माथुर, तरुण व्यास, नितांशा शर्मा, प्रज्ञा, आयुषि शेखावत, अनामिका अनंत, अजहर, राधिका, बबिता, अंकित, नेहा आदि ने कार्यक्रम के दौरान स्वरचनाओं से मां को आदरांजलि दी। कार्यक्रम की समाप्ति के दौर में सभी कलाकारों और अतिथियों को स्मृति चिह्न से सम्मानित किया गया।

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