हिंदी प्रचार प्रसार समिति के उपाध्यक्ष का केंद्रीय मंत्री को पत्र

giriraj singh

हिंदी प्रचार प्रसार समिति के उपाध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने को केंद्रीय मंत्री गिरीराज सिंह को एक पत्र लिखा। इसमें उन्होंने हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए उनके मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा दैनिक कार्यालयिक व्यवस्थाओं में हिंदी इस्तेमाल करने पर जोर दिया। अग्रवाल ने हिंदी के लिए मोदी सरकार की कोशिशों की तारीफ करते हुए इस कदम को महत्त्वपूर्ण बताया। ये पत्र अक्षरश: नीचे दिया गया है –

“श्री गिरीराज सिंह
केंद्रीय पशुपालन, डेरी व मत्स्य पालन मंत्री
भारत सरकार

आपके मंत्रायल के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा हिंदी के प्रयोग के बारे में में निवेदन।

भाषा राष्ट्र की संस्कृति की वाहक होती है। अत: भाषा राष्ट्रवाद एक महत्त्वपूर्ण अंग है। इस तथ्य को भाजपा के अतिरिक्त अन्य राजनीतिक दलों के नेता शायद ही समझें। वर्ष 2014 में जबसे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने सरकार की कमान संभाली है तब से हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं के लिए आशा की किरण जागी है। प्रधानमंत्री मोदी सभी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी में ही अपनी बात रखते हैं। केंद्र सरकार के अन्य मंत्री भी सार्वजनिक मंचों पर अधिकतर हिंदी में ही अपनी बात रखते हैं, लेकिन सरकार के मंत्रालयों में कामकाज की भाषा अंग्रेजी ही बनी हुई है।

सरकार की दूसरी पारी के आरम्भ में ही मानव संसाधन विकास मंत्री श्री रमेश पोखरियाल निशंक और सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री प्रकाश जावडेकर जी ने कुछ इस प्रकार के निर्देश जारी किए हैं जिनसे हिंदी और भारतीया भाषाओं के फलने फूलने में आसानी होगी। माननीय मंत्री जी आपका मंत्रालय देश के उस वर्ग से ही नहीं अपितु आम, छोटे और अंग्रेजी ना जानने वाले निवेशकों के लिए भी उतनी ही महत्त्वपूर्ण है। इसका ज्वलंत उदाहरण है आज वाणिज्य व आर्थिक विषयों से जुड़े हिंदी टीवी चैनलों को देखने वालों की संख्या अंग्रेजी के चैनलों से कई गुणा है। अंग्रेजी में आम आदमी सहज अनुभव नहीं करता।

आप से निवेदन है कि चार्टर्ड अकाउंटेट्स द्वारा दी जाने वाली ऑडिट रिपोर्ट हिंदी में भी लिखनी शुरू की जाए। शुरुआत करने के लिए ऑडिट रिपोर्ट में हिंदी में एक संक्षिप्त जानकारी दी जाए जिसमें संबंधित कम्पनी/संस्था के बारे में सभी महत्त्वपूर्ण तथ्यों को बताया जाए जो कि कम्पनी/संस्था के वर्तमान निवेशकों और भविष्य में होने वाले निवेशकों की जानकारी में आनी जरूरी है। वे ऐसी कौनसी जानकारियां हैं, इसका निर्णय ICAI की केंद्रीय कारिणी कर ले। प्रांतीय सरकारों द्वारा स्थापित इकाइयों व संस्थाओं की संक्षिप्त रिपोर्ट प्रांतीय भाषा में लिखने का प्रावधान हो। यदि कोई निजी संस्थान भी हिंदी अतिरिक्त अन्य भाषा में यह सुविधा चाहता है तो उसे ऐसा अधिकार रहे।

इंस्टीट्यूट द्वारा केंद्रीय और आंचलिक स्तर पर प्रकाशित सभी पत्र पत्रिकाएं केवल अंग्रेजी में होती हैं। आज कल तो लगभग सभी विषयों (विज्ञान व तकनीकी क्षेत्र के विषयों जिनमें हिंदी शब्दावली का मिलना भी कठिन है) में भी हिंदी भाषा में पत्र-पत्रिकाएं प्रकाशित हो रही हैं। आप से अनुरोध है कि इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेट्स भी शुरुआत इंस्टीट्यूट की केंद्रीय पत्रिकाओं में कुछ पन्ने हिंदी में लेखन के लिए सुरक्षित कर दिए जाएं और आंचलिक केंद्र की पत्रिकाओं में कुछ पन्ने हिंदी/आंचलिक भाषा में लेखन के लिए सुरक्षित किए जा सकते हैं।

ऐसा करने से न केवल हिंदी और भारतीय भाषाओं के विकास के लिए उपयोगी होगा, अपितु साधारण जन को भी ऑडिट रिपोर्ट की जटिलताओं को समझाने का अवसर मिलेगा। ICAI संस्था के ध्येय वाक्य “ICAI – Partner in Nation Building” के संबंध मे कहना है कि इस देश की बिल्डिंग का एक अंग भाषा भी है। आदरणीय मंत्री जी कृपया हमारी प्रार्थना पर विचार करें।
विनीत
प्रेमचंद अग्रवाल
उपाध्यक्ष
हिंदी प्रचार-प्रसार समिति, अम्बाला शहर”

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